आपको याद होगा कि किस प्रकार NDTV और अन्य मोदी-विरोधी मीडिया ने एक भ्रम फैलाने का प्रयास किया था कि गैस कनेक्शन देने से कुछ नहीं होगा क्योंकि जो लाभार्थी हैं उनके पास तो इतने पैसे भी नहीं हैं कि जब पहला सिलिंडर खाली हो जाये तो दुबारा गैस भरवा पायें। उन्होंने झूठ फैलाया कि लोग गैस सिलिंडर तो ले जा रहे हैं पर वापस भरवाने आ ही नहीं रहे हैं। पर Financial Express में आज छपी एक रिपोर्ट बताती है कि 82% लोग गैस भरवाने आ रहे हैं और औसतन एक लाभार्थी परिवार साल में 6.5 बार गैस भरवा रहा है।

क्यों नहीं भरवाये भला! गैस सब्सिडी का लाभ लेने वाले परिवार को मात्र ₹500 लगते हैं एक रिफिल के। और मध्यम वर्गीय परिवार की तरह उसका एक सिलिंडर सिर्फ एक महीना नहीं चलता बल्कि दो महीने चलता है, क्योंकि उसके पास पैसे कम हैं तो वह आप की तुलना में खाना कम बनाता है। आप दो सब्ज़ी बनाते हैं तो वह एक ही बनाता है। आप शाम को नाश्ता बनाते हैं, वह नहीं बनाता। आप चार बार चाय पीते हैं, वह दो बार ही पीता है। आपके यहाँ guests ज़्यादा आते हैं, उसके यहाँ कम आते हैं।

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कहने का मतलब ये कि महान पत्रकार रवीश कुमार के घर में गैस की जितनी खपत होती है, एक BPL घर में गैस की उतनी खपत नहीं होती। और अगर किसी परिवार में गैस की उतनी ही खपत होती है जितनी कि लाखों रुपये सैलरी कमाने वाले रवीश कुमार के घर में, तो फिर वह परिवार निश्चित रूप से BPL परिवार नहीं है।

तो कुल मिला के एक BPL परिवार में गैस पर महीने भर का खर्च आता है ₹250 मात्र। अब खाना पकाने के लिये इतना खर्च तो कोई भी परिवार उठा ही सकता है। अरे वो गरीब है, भिखारी नहीं, जैसा कि NDTV समझ रहा है, या फिर समझाने का प्रयास कर रहा है।

#उज्ज्वला_योजना के तहत प्रतिदिन 70,000 गैस कनेक्शन वितरित किये जा रहे हैं। अब तक 7 करोड़ से अधिक परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिया जा चुका है। भारतवर्ष में LPG coverage जो 2014 में मात्र 55% था अब बढ़ कर 93% हो चुका है। यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है।

उज्ज्वला ने महिलाओं का काफी समय बचाया है। पहले ईंधन के लिये लकड़ी इकट्ठा करने में जो समय खर्च होता था वो अब नहीं होता। खाना पकाने में अब पहले की तुलना में कम समय लगता है। इस बचे हुए समय का उपयोग अब ये महिलायें अपनी घरेलू आय को बढ़ाने के लिये कर सकती हैं।

IIM Ahmedabad के पूर्व निदेशक Prof SK Barua ने देश के सबसे बड़े सामाजिक परिवर्तन कार्यक्रमों में से एक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के ऊपर एक अध्ययन-रिर्पोट जारी की है जिसका शीर्षक है ‘Lighting up Lives through Cooking Gas and Transforming Society. यह अध्ययन रिपोर्ट अब विश्व के सामने है और विश्व के अन्य देश इस योजना के संबंध में भारत के अनुभवों से लाभ उठा सकते हैं। इस तरह प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना कई देशों के लिये आदर्श के रूप में सामने आएगी।

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